
मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। एक प्रमुख नेता के ‘मुंबई में जन्मा हूं’ वाले बयान ने सियासी मैदान में हंगामा मचा दिया है, जिस पर भाजपा ने तीखा पलटवार किया है।
भाजपा नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि शहर की सेवा जन्मस्थान से नहीं, कर्म से तय होती है। उन्होंने बीते वर्षों में सड़कें चौड़ी करने, जल आपूर्ति सुधारने और कचरा प्रबंधन जैसे कार्यों का हवाला दिया। ‘मुंबई सभी भारतीयों की है, किसी एक का जन्मसिद्ध अधिकार नहीं,’ उन्होंने जोर देकर कहा।
बीएमसी चुनाव में 227 वार्डों पर कब्जे की जंग है। भारत की सबसे अमीर नागरिक संस्था होने के नाते इसका बजट 52 हजार करोड़ से अधिक का है। शिवसेना (यूबीटी) और अन्य विपक्षी दलों के ‘स्थानीय बनाम बाहरी’ वाले नैरेटिव को भाजपा तोड़ने की कोशिश कर रही है।
विपक्ष का आरोप है कि भाजपा के राज में गड्ढे, बाढ़ जैसी समस्याएं बरकरार हैं। लेकिन पार्टी दावा कर रही है कि उनके नेतृत्व में मुंबई विश्वस्तरीय शहर बनेगी। अभियान तेज हो गए हैं, घर-घर जाकर वोट मांगे जा रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद मतदाता जागरूकता बढ़ाएगा। मुंबई की जनता विकास और जवाबदेही के पैमाने पर फैसला लेगी, जो न केवल बीएमसी बल्कि राज्य की सियासत को प्रभावित करेगा।