
पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपनी नई राज्य समिति का गठन किया है, जिसमें वरिष्ठ नेता दिलीप घोष, सुकांत मजूमदार और सुवेंदु अधिकारी को शामिल नहीं किया गया। इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
पार्टी नेताओं के अनुसार, यह कदम संगठन में नई ऊर्जा भरने और आगामी चुनावों की तैयारी के लिए उठाया गया है। राज्य नेतृत्व का कहना है कि बूथ स्तर पर मेहनत करने वाले कार्यकर्ताओं और उभरते नेताओं को प्रोत्साहन देना जरूरी था।
दिलीप घोष पूर्व प्रदेश अध्यक्ष हैं, जिनकी तृणमूल कांग्रेस पर तीखी आलोचना मशहूर है। सुकांत मजूमदार वर्तमान प्रदेशाध्यक्ष हैं, जबकि सुवेंदु अधिकारी विधानसभा में विपक्ष के नेता। इन तीनों का नाम 20 सदस्यीय समिति की सूची में नहीं दिखा।
‘बंगाल बीजेपी को मजबूत आधार चाहिए। नई चेहरों को मौका देकर हम संगठन को व्यापक बना रहे हैं,’ एक वरिष्ठ नेता ने कहा। समिति में युवा नेता, जिला अध्यक्ष और महिला प्रतिनिधि शामिल हैं।
यह बदलाव तब हो रहा है जब 2024 लोकसभा चुनावों में बीजेपी को 42 में से 12 सीटें मिलीं, जो 2019 के 18 से कम हैं। 2026 विधानसभा चुनावों से पहले यह रणनीति ममता बनर्जी की टीएमसी को चुनौती देने के लिए है।
पार्टी में आंतरिक कलह की चर्चाएं हैं, लेकिन आधिकारिक बयान इसे खारिज करते हैं। ‘सभी नेता महत्वपूर्ण हैं, यह सामान्य संगठनात्मक बदलाव है।’ अब नई समिति की नजर सदस्यता अभियान और मतदाता संपर्क पर है।
बंगाल की राजनीति में यह कदम निर्णायक साबित हो सकता है। क्या यह एकता लाएगा या विभाजन? समय जवाब देगा।