
तिरुवनंतपुरम में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने राज्य सरकार द्वारा स्थानीय स्वशासन निकायों के लिए जस्टिस (रिटायर्ड) बाबू मैथ्यू पी. जोसेफ की लोकपाल के रूप में नियुक्ति का जोरदार विरोध दर्ज किया है। भाजपा नेताओं ने इस फैसले को केरल लोकायुक्त अधिनियम-1999 की धारा 5(3) का स्पष्ट उल्लंघन बताते हुए राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर को एक विस्तृत पत्र सौंपा।
शनिवार को भाजपा की केरल इकाई के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर और महासचिव एडवोकेट एस. सुरेश ने लोक भवन में राज्यपाल से भेंट की। उन्होंने कैबिनेट के इस निर्णय पर सवाल उठाते हुए कहा कि पूर्व लोकायुक्त या उप लोकायुक्त किसी भी सरकारी पद पर नहीं बैठ सकते, जो लाभ का हो। लोकपाल का पद सरकारी फंड से वित्त पोषित होने के कारण इस प्रतिबंध के दायरे में आता है।
नेताओं ने जोर देकर कहा कि अधिनियम की धारा में कोई अस्पष्टता नहीं है और मनमानी व्याख्या की कोई गुंजाइश नहीं। इस तरह की नियुक्ति कानूनी रूप से अमान्य होगी तथा अदालती जांच का सामना करेगी। भाजपा ने संस्थागत स्वायत्तता पर भी चिंता जताई, कहा कि ऐसी नियुक्तियां निगरानी तंत्र की निष्पक्षता को कमजोर करेंगी।
जमीनी स्तर के शासन की मजबूती के लिए पात्रता मानदंडों का कठोर पालन आवश्यक है, याचिका में उल्लेख किया गया। राज्यपाल से संवैधानिक विवेक का उपयोग कर कैबिनेट फैसले को पुनर्विचार के लिए लौटाने का आग्रह किया गया।
लोक भवन ने एक्स पर पुष्टि की कि भाजपा नेताओं ने अधिनियम के प्रावधानों का हवाला देकर नियुक्ति का विरोध किया। यह घटना केरल में नियुक्ति प्रक्रिया पर नई बहस छेड़ सकती है, जहां कानूनी शुद्धता और प्रशासनिक पारदर्शिता प्रमुख मुद्दे बन रहे हैं।