
उत्तर प्रदेश के संभल में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर के अचानक तबादले ने राजनीतिक हलकों में भूचाल ला दिया है। कांग्रेस के मीडिया प्रभारी पवन खेड़ा ने शनिवार को प्रेस वार्ता में भाजपा पर न्यायपालिका को अपने वश में करने की साजिश रचने का गंभीर आरोप लगाया।
खेड़ा ने सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को निशाना बनाते हुए कहा कि दूसरे राज्यों के असफल फॉर्मूले यहां थोपे जा रहे हैं। संभल के वकील भड़क गए हैं, विरोध प्रदर्शन तेज हो चुके हैं। देश भर में युवा, महिलाएं, छात्र, मजदूर, धार्मिक नेता और मध्यम वर्ग भाजपा से त्रस्त हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में गुजरात दंगों के आरोपी बाबू बजरंगी का वीडियो दिखाते हुए खेड़ा ने दावा किया कि तत्कालीन गुजरात सरकार ने जज बदलकर आरोपी को फायदा पहुंचाया था। यही तौर-तरीका अब यूपी में अपनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि 19 जनवरी को सीजेएम सुधीर ने संभल हिंसा के गोलीकांड में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर के आदेश दिए थे। इसके कुछ ही दिनों बाद उनका तबादला सुल्तानपुर में जूनियर पद पर कर दिया गया। नया जज लाने पर वकीलों ने हंगामा किया, उसे भी हटा दिया।
खेड़ा ने दिल्ली दंगों में जस्टिस मुरलीधर के आधी रात तबादले और गुजरात के वंजारा, कोडनानी जैसे मामलों का जिक्र किया। ‘जज बदलो या मोटा भाई स्टाइल में हटाओ, ये लोकतंत्र के लिए घातक है,’ उन्होंने व्यंग्य किया।
कांग्रेस नेता ने चेतावनी दी कि जब शासक धर्म-जाति देखकर न्याय रोकें, तो लोकतंत्र का क्या होगा। पार्टी वकीलों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के 14 जजों के तबादले ने संदेहों को और गहरा दिया है।
ये घटनाक्रम न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं, जहां स्वतंत्रता पर खतरा मंडरा रहा है। कानूनी समुदाय को एकजुट होकर इसका मुकाबला करना होगा।