
बिहार के मुंगेर जिले में नक्सली खतरे का अंतिम अध्याय लिखा गया। तीन लाख रुपये के इनामी कुख्यात नक्सली कमांडर सुरेश कोड़ा ने गुरुवार को पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। पिछले 25 वर्षों से पहाड़ी इलाकों में छिपकर सक्रिय इस नक्सली ने भारी हथियारों का जखीरा सौंपते हुए माफी मांगी।
मुंगेर पुलिस केंद्र में डीआईजी राकेश कुमार, एसटीएफ डीआईजी संजय कुमार सिंह और डीएम निखिल धनराज की मौजूदगी में कोड़ा ने हथियार डाले। इसमें एके-47, एके-56, दो इंसास राइफलें और 505 कारतूस शामिल थे। पुलिस के अनुसार, वह 60 से अधिक नक्सली व आपराधिक घटनाओं का आरोपी था।
पिछले एक साल में मुंगेर में नक्सल विरोधी अभियान ने कमर तोड़ दी। राजासराय मुठभेड़ में उसके दस्ते का बुरा हाल हुआ, कई साथी सरेंडर कर चुके। दिसंबर में तीन कमांडरों ने हथियार त्यागे, जुलाई में एक सदस्य ने संगठन छोड़ा।
राज्य सरकार की आत्मसमर्पण नीति के तहत कोड़ा को तीन लाख इनाम के अलावा पांच लाख प्रोत्साहन राशि, कौशल प्रशिक्षण, नौकरी व पुनर्वास पैकेज मिलेगा। उसने लोगों से क्षमा याचना की, एसटीएफ जिंदाबाद के नारे लगाए।
भतीजा रंजन कोड़ा ने कहा, गांव अब नक्सल मुक्त है। विकास योजनाओं से युवा हिंसा से दूर हो रहे। प्रशासन का दावा—सुरक्षा, विकास व जन सहयोग से क्षेत्र शांत। भविष्य में निगरानी बरकरार रहेगी।