
बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। गया में बोलते हुए उन्होंने कहा कि नीति तो छोटे मात्रा में शराब ले जाने वालों को छोड़ने की बनी, लेकिन पुलिस उल्टा उन पर ही जुल्म कर रही है। वहीं लाखों लीटर शराब लाने वाले माफिया रिश्वत देकर आजाद हो जाते हैं।
मांझी ने बताया कि शराबबंदी की तीसरी समीक्षा में यह तय हुआ था कि एक पौआ ले जाने वालों को नहीं पकड़ा जाएगा। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है। होम डिलीवरी का धंधा जोरों पर है और पड़ोसी राज्यों से महंगी शराब आ रही है, जिससे बिहार का पैसा बाहर जा रहा। 1 अप्रैल 2016 से लागू इस कानून से राज्य को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है।
राष्ट्रीय लोक मोर्चा के विधायक माधव आनंद ने विधानसभा में इस मुद्दे को जोरदार ढंग से उठाया था। बजट सत्र में उन्होंने नीतीश कुमार की मौजूदगी में कानून की गहन समीक्षा की मांग की। उन्होंने कहा कि 10 साल बाद यह देखना जरूरी है कि राज्य ने क्या खोया और क्या पाया। शराबबंदी के फैसले की तारीफ तो की, लेकिन अवैध कारोबार पर सवाल उठाए।
मांझी के बयान से बिहार की राजनीति में हलचल मच गई है। एनडीए के अंदर ही ऐसी आलोचना से नीतीश सरकार पर दबाव बढ़ा है। क्या शराबबंदी पर कोई बड़ा बदलाव होगा, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।