
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने लैंड फॉर जॉब घोटाले में पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी के खिलाफ औपचारिक आरोप तय कर दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट कहा कि लालू की देखरेख में एक बड़ा क्रिमिनल साजिश रची गई थी। दोनों ने आरोपों को खारिज करते हुए मुकदमे का सामना करने की बात कही है।
स्पेशल जज विशाल गोगने ने निर्देश दिया कि विशेष अनुमति के बिना सभी आरोपी व्यक्तिगत रूप से पेश हों। मीसा भारती को उम्र व स्वास्थ्य कारणों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की छूट मिली। कोर्ट का मानना है कि लालू ने मंत्री पद का दुरुपयोग कर ग्रुप-डी नौकरियों को सौदेबाजी का हथियार बनाया और परिवार के जरिए जमीनें हासिल कीं।
इस साजिश में राबड़ी, मीसा भारती, हेमा यादव, तेजस्वी व तेज प्रताप यादव के नाम शामिल हैं। 2004-09 के दौरान रेलवे भर्तियों में जमीन के बदले नौकरी देने का आरोप है। हालांकि, कोर्ट ने 52 रेल अधिकारियों समेत चीफ पर्सनल ऑफिसर्स को बरी कर दिया, क्योंकि उनके पास नियुक्ति का अधिकार नहीं था और दबाव का कोई प्रमाण नहीं मिला।
सीबीआई की चार्जशीट में प्रक्रिया का खुलासा है। लालू के वकील मनिंदर सिंह ने इसे राजनीतिक साजिश बताया। उन्होंने कहा, सेल डीड से साफ है कि जमीनें पैसे देकर खरीदी गईं, कोई सिफारिश नहीं हुई। फिर भी, कोर्ट ने आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी व भ्रष्टाचार के आरोप लगाए।
18 मई 2022 को दर्ज केस में दो मुख्य व दो पूरक चार्जशीट दाखिल हुईं। 103 में से 5 की मौत हो चुकी। 9 जनवरी के आदेश के बाद यह कदम उठा। मामला बिहार राजनीति को हिला सकता है।