
देश में होली 2026 का उत्साह चरम पर है। भागलपुर की महिलाएं इस बार प्राकृतिक रंगों से होली को यादगार बनाने को तैयार हैं। चुकंदर, पालक और फूलों से बनाया जा रहा केमिकल-मुक्त हर्बल गुलाल न सिर्फ त्वचा के लिए सुरक्षित है, बल्कि इसमें अरोमाथेरेपी के गुण भी हैं जो तनाव दूर करते हैं।
मां आनंदी संस्था के तहत स्वयं सहायता समूहों में सैकड़ों महिलाएं जुटी हैं। गुलाब, लैवेंडर, चंदन व केवड़े की सुगंध से युक्त यह गुलाल मंदिरों के फूलों को रिसाइकल कर तैयार किया जा रहा है। संस्थापिका प्रिया सोनी बताती हैं कि यह पूरी तरह प्राकृतिक है, इससे होली खेलें या हलवा बनाकर खाएं- कोई नुकसान नहीं।
इस पहल से पर्यावरण संरक्षण के साथ महिलाओं को रोजगार मिल रहा है। वेस्ट टू वेल्थ मॉडल पर आधारित यह प्रयास ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहा है। डिमांड इतनी कि बाजार में टूट पड़े लोग। बच्चों व बुजुर्गों के लिए आदर्श, कोई इंफेक्शन का खतरा नहीं।
होली का यह नया रूप परंपरा को स्वास्थ्य व पर्यावरण से जोड़ रहा है, जिससे त्योहार और भी खास बन रहा है।