
बिहार के दरभंगा जिले में एक छोटे से मजदूरी भुगतान के विवाद ने भयानक रूप धारण कर लिया है। कुशेश्वरस्थान के हरिनगर गांव में 30 जनवरी को शुरू हुआ यह मामला अब जातिगत टकराव बन चुका है, जिसमें 220 लोगों पर एससी/एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज हो गया है।
कैलाश पासवान ने हेमकांत झा के बहन-बहनोई की बाइक रोककर 2.47 लाख रुपये के बकाया मजदूरी की मांग की। बातचीत से झगड़ा बढ़ा और धक्कामुक्की हो गई। ग्रामीणों के बीच-बचाव के बावजूद 31 जनवरी को पंचायत में तनाव चरम पर पहुंचा। ब्राह्मण समाज के लोग कथित तौर पर बड़ी संख्या में पासवान टोले पर टूट पड़े, दुकानों-घरों में तोड़फोड़ की और 11 लोग घायल हो गए।
डीएमसीएच में भर्ती घायलों का वीडियो वायरल हो चुका है, जो घटना की भयावहता दर्शाता है। अशर्फी पासवान की शिकायत पर पुलिस ने 70 नामजद और 150 अज्ञात के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की। एसडीपीओ बिरौल ने 12 गिरफ्तारियों की पुष्टि की और बताया कि मूल मुद्दा रुपये का लेन-देन ही था।
ब्राह्मण पक्ष का दावा है कि यह निजी लेन-देन का मामला था, जिसे जाति का रंग दे दिया गया। मुकदमे में अनुपस्थित लोगों के नाम जोड़ने पर सवाल उठे हैं। एससी/एसटी कार्यकर्ता भी इसे मानते हैं और सही दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
गांव में तनाव व्याप्त है, नामजद लोग फरार हैं। राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष धनंजय कुमार ने घायलों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि असामाजिक तत्वों ने छोटे विवाद को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया। बिहार सरकार के निर्देश और सांसद चिराग पासवान के कहने पर वे जांच के लिए पहुंचे। पीड़ितों को न्याय मिलेगा, समाज में सौहार्द बनाए रखने वालों पर सख्ती होगी।
यह घटना ग्रामीण भारत में आर्थिक विवादों के जातीय रूप लेने की पोल खोलती है।