बिहार में 220 किमी लंबे 3 मेगा एक्सप्रेस-वे को मिली मंजूरी
बिहार में सड़क कनेक्टिविटी के एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। राज्य सरकार ने गंगा और गंडक नदियों के किनारे 220 किलोमीटर लंबे तीन नए फोरलेन रिवरफ्रंट एक्सप्रेस-वे बनाने की योजना को हरी झंडी दे दी...


बिहार में सड़क कनेक्टिविटी के एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। राज्य सरकार ने गंगा और गंडक नदियों के किनारे 220 किलोमीटर लंबे तीन नए फोरलेन रिवरफ्रंट एक्सप्रेस-वे बनाने की योजना को हरी झंडी दे दी है। इन परियोजनाओं को विश्वामित्र पथ, अंबिका पथ और नारायणी पथ का नाम दिया गया है। बिहार राज्य पथ विकास निगम (BSRDC) ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह पूरी परियोजना पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर आधारित होगी, जो बिहार के आर्थिक और औद्योगिक विकास के लिए 'गेम चेंजर' साबित हो सकती है। इन एक्सप्रेस-वे के माध्यम से न केवल यात्रा का समय कम होगा, बल्कि राज्य के दूर-दराज के क्षेत्रों को राष्ट्रीय राजमार्गों से बेहतर तरीके से जोड़ा जा सकेगा। परियोजना के तहत विश्वामित्र पथ लगभग 90 किलोमीटर लंबा होगा, जो मनेर से बक्सर तक जाएगा और बिहार को सीधे उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जोड़ेगा। इससे दिल्ली और लखनऊ तक का सफर बेहद आसान हो जाएगा। वहीं, 56 किलोमीटर लंबा अंबिका पथ पटना के ट्रैफिक दबाव को कम करने और प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक पहुंच को सुगम बनाने के लिए बनाया जा रहा है। तीसरा, नारायणी पथ गंडक नदी के किनारे 74 किलोमीटर लंबा होगा, जो सोनपुर से गोपालगंज तक बनेगा। यह मार्ग पटना को सीधे ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर से जोड़ते हुए व्यापार और माल परिवहन को एक नई रफ्तार देगा। इन तीनों एक्सप्रेस-वे के निर्माण से न केवल यातायात सुगम होगा, बल्कि पर्यटन और रोजगार के क्षेत्र में भी व्यापक अवसर पैदा होंगे।

