
बिहार विधान परिषद में सोमवार को सामने आए आंकड़ों ने राज्य की सड़कों पर सुरक्षा की पोल खोल दी। पिछले सात वर्षों में सड़क दुर्घटनाओं में 50,000 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि हजारों घायल हुए हैं। यह खुलासा निर्दलीय विधान पार्षद महेश्वर सिंह के सवाल पर हुआ, जिन्होंने पूर्वी चंपारण के मोतिहारी में 2025 के 393 मौतों का जिक्र किया।
पथ निर्माण मंत्री दिलीप जायसवाल ने एनसीआरबी के आंकड़े पेश करते हुए पुष्टि की कि 2019 से 2026 तक 50,941 लोगों की मौत हुई और 44,000 के करीब घायल हुए। इनमें 50 प्रतिशत युवा 18-35 वर्ष के थे। मंत्री ने माना कि हादसे राज्य भर में बढ़े हैं और 1,044 ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए हैं। इन पर जागरूकता अभियान, साइनेज और जेब्रा क्रॉसिंग बढ़ाने जैसे कदम उठाए जा रहे हैं।
चर्चा में अटल पथ भी घिरी, जिसे कांग्रेस विधान पार्षद समीर कुमार सिंह ने असुरक्षित बताया। उन्होंने गति नियंत्रण की कमी पर सवाल उठाए। मंत्री ने कहा कि फुट ओवर ब्रिज हैं लेकिन सीसीटीवी में केवल 5-10 लोग इस्तेमाल करते हैं। साइन बोर्ड, सर्विस रोड मौजूद हैं, मगर जागरूकता की कमी है। निर्माण मानकों के अनुरूप है।
बिहार सरकार को अब सख्त कदम उठाने होंगे ताकि युवाओं की जान बच सके और सड़कें सुरक्षित बनें।