
केंद्रीय बजट से ठीक पहले पेश हुए आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 ने बिहार को भारत का सबसे गरीब राज्य घोषित कर दिया है। प्रति व्यक्ति सालाना आय महज 70 हजार रुपये से भी कम होने के कारण बिहार 34 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सूची में सबसे निचले पायदान पर है। इस रिपोर्ट ने बिहार की राजनीति को गरमा दिया है।
सर्वे के अनुसार, 2024-25 में बिहार का सकल घरेलू उत्पाद 8 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है, जो 12 अन्य राज्यों से छोटा है। वर्तमान मूल्यों पर विकास दर 13.07 प्रतिशत रही, जो 22 राज्यों से बेहतर है, लेकिन राज्य अपनी पिछली तीन वर्षों की दर से पीछे रह गया।
मुख्य विपक्षी दल आरजेडी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधा। प्रवक्ता शक्ति यादव ने कहा, ’20 साल से नीतीश की सरकार है, फिर भी बिहार सबसे गरीब क्यों? पुरानी सरकारों पर दोषारोपण बंद करें।’
जदयू के नीरज कुमार ने जवाब दिया, ‘नीतीश ने बिहार को खराब हालत से निकाला। अब कई क्षेत्रों में नंबर वन है।’
यह आंकड़े बिहार की विकास यात्रा पर सवाल उठाते हैं। उच्च वृद्धि दर के बावजूद प्रति व्यक्ति आय न के बराबर बढ़ी। विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग तेज हो गई है। बजट में बिहार को क्या मिलता है, यह देखना दिलचस्प होगा।