गंगा जल बंटवारे पर बिहार की नई माँगें
बक्सर से आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक औपचारिक पत्र लिखकर गंगा जल बंटवारे समझौते की तीस साल पुरानी समीक्षा से पहले बिहार को ब्रेक देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस समझौते को बिना बिहार की स्वीकृति के तैयार किया गया था और अब यह बिहार के जल, नाव चलाने और आर्थिक हितों को खतरा बना रहा है।
1996 में भारत‑बांग्लादेश के बीच किए गए इस समझौते की अवधि 30 साल है और यह दिसंबर 2026 में समाप्त हो रहा है। समीक्षा के दौरान बिहार को गंगा के प्रवाह, ऊपरी क्षेत्रों में जल उपयोग, बाढ़ और कटाव जैसी समस्याओं के समाधान का अवसर मिलना चाहिए।
बिहार जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार फरवरी में प्रवाह केवल 330 क्यूमेक, मार्च में 487 क्यूमेक और अप्रैल में 191 क्यूमेक रहा, जो निर्धारित मानकों से काफी कम है। इस कमी से नदी का गहरा होना घट रहा है और व्यावसायिक नावें चलाने में दिक्कत पैदा हो रही है।
भूमि घेराव वाले बिहार के लिए गंगा पर माल को हल्दिया और कोलकाता पोर्ट तक पहुँचाने का भारी निर्भरता है। इसलिए सांसद ने नेशनल वाटरवे‑1 पर कम से कम 2.5‑3 मीटर पानी की गहराई बनाए रखने, ड्रेजिंग, मल्टी‑मॉडल टर्मिनलों का निर्माण और बाढ़‑प्रबंधन में केंद्र सरकार की सहायता की माँग की है।


