
भारत-नेपाल सीमा पर रक्सौल बॉर्डर मानव तस्करों का प्रमुख केंद्र बन चुका है। एक अंतरराष्ट्रीय गिरोह मासूम लड़कियों को वेश्यावृत्ति और अवैध अंग व्यापार में धकेलकर सालाना 400 करोड़ रुपये कमाने की साजिश रच रहा था। व्हाट्सएप चैट लीक होने से यह राज खुला है, जिसने सुरक्षा बलों को चौंका दिया।
लीक चैट्स में तस्करों की क्रूरता साफ झलकती है। एक संदेश में लिखा, ‘400 करोड़ चाहिए और वीडियो भी नहीं भेज रहे।’ एजेंट लड़कियों को प्यार या नौकरी के लालच में फंसाते हैं, फिर बॉस को नाम, उम्र, वजन, ऊंचाई, दाग-धब्बों की पूरी जानकारी भेजते हैं। शरीर को इंच टेप से नापने के आदेश हैं, मासिक धर्म की तिथि तक नोट की जाती है।
लड़की पहुंचाने पर एजेंट को 50,000 से 1 लाख रुपये मिलते हैं। पुलिस से बचने को दिल्ली के लिए ‘मामी’, मुंबई के लिए ‘मौसी’, हैदराबाद के लिए ‘बुआ’, लुधियाना के लिए ‘दीदी’ जैसे कोडवर्ड इस्तेमाल होते हैं।
रक्सौल डीएसपी मनीष आनंद ने बताया कि सोशल मीडिया और प्रेम जाल से फंसाकर अश्लील वीडियो बनाए जाते हैं, फिर ब्लैकमेल कर बेच दिया जाता है। एनजीओ स्वच्छ रक्सौल के रंजीत सिंह ने 600 से ज्यादा लड़कियों को बचाया है, जबकि पुलिस ने 100 से अधिक को रेस्क्यू किया।
यह भंडाफोड़ सीमा सुरक्षा और डिजिटल निगरानी की महत्ता बताता है। समाज को सतर्क रहना होगा।