
बिहार पर्यटन विभाग ने बौद्ध सर्किट को और समृद्ध बनाने के लिए भागलपुर के कहलगांव में स्थित विक्रमशिला विश्वविद्यालय के भग्नावशेषों को आधिकारिक रूप से शामिल कर लिया है। अब इस सर्किट में आठ जिलों के प्रमुख स्थल हैं, जो बौद्ध यात्रियों और इतिहास प्रेमियों के लिए नया आयाम जोड़ेंगे।
पाल वंश के राजा धर्मपाल द्वारा स्थापित यह विश्वविद्यालय 13वीं शताब्दी तक ज्ञान का प्रमुख केंद्र रहा। यहां दर्शन, व्याकरण, तर्कशास्त्र, तंत्र और धर्मशास्त्र जैसे विषयों पर भारत-विदेश से विद्वान अध्ययनरत रहते थे।
परिसर की दो मंजिला विशाल स्तूप और क्रूस आकार की संरचना आज भी आकर्षण का केंद्र है। इसके अलावा पुस्तकालय, तिब्बती मंदिर और हिंदू मंदिर के अवशेष इसकी सांस्कृतिक समृद्धि की गवाही देते हैं।
बोधगया में चल रहे ब्रांडिंग अभियान से विदेशी पर्यटकों को विक्रमशिला की ओर प्रेरित किया जा रहा है। इससे भागलपुर में पर्यटन बढ़ेगा और स्थानीय रोजगार को नई उड़ान मिलेगी।
अब सर्किट में गया-बोधगया की ज्ञानभूमि, नालंदा-राजगीर का शिक्षा केंद्र, वैशाली की बौद्ध कर्मभूमि, पटना का पाटलिपुत्र, जहानाबाद की बराबर गुफाएं, चंपारण के स्तूप और भागलपुर का विक्रमशिला शामिल हैं। यह कदम बिहार की विरासत को वैश्विक पटल पर लाने वाला मील का पत्थर है।