
वाराणसी के बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में आज ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ के तहत निकाले गए शांतिपूर्ण मार्च को रोकने का प्रयास पुलिस ने किया। राष्ट्रीय छात्र संघ (एनएसयूआई) के अध्यक्ष ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया। यह प्रदर्शन ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना को बचाने के उद्देश्य से आयोजित था, जो करोड़ों मजदूरों की आजीविका का आधार है।
मार्च में छात्रों ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के लिए एकजुट होकर नारे लगाए। योजना में कथित कटौती और कार्यान्वयन में बाधाओं के खिलाफ बैनर लहराए गए। विश्वविद्यालय द्वार के पास पुलिस बैरिकेडिंग ने तनाव पैदा कर दिया।
एनएसयूआई नेताओं का आरोप है कि सरकार आलोचनात्मक आवाजों को दबा रही है। अधिकारियों ने कहा कि यह कदम परिसर में व्यवस्था बनाए रखने के लिए था। कोई गिरफ्तारी नहीं हुई, लेकिन घटना ने छात्र आंदोलन और सरकारी जवाबदेही पर बहस छेड़ दी।
मनरेगा 2005 से ग्रामीण भारत की रीढ़ बनी हुई है, जिसने अरबों व्यक्ति-दिन का रोजगार सृजित किया। महामारी काल में इसकी भूमिका सराहनीय रही। एनएसयूआई ने पूरे देश में अभियान जारी रखने का ऐलान किया। बीएचयू प्रशासन ने संयम बरतने की अपील की। यह घटना युवाओं की सक्रियता को रेखांकित करती है।