
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दूसरे चरण की मतदाता सूची मसौदे पर दावों-आपत्तियों की सुनवाई में तृणमूल कांग्रेस की बूथ लेवल एजेंट्स (बीएलए) को शामिल करने की मांग को चुनाव आयोग ने साफ तौर पर खारिज कर दिया है। चुनाव आयोग ने व्यावहारिक कारणों से यह फैसला लिया है।
यह सुनवाई SIR के महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो राज्य में मतदाता सूची को अपडेट करने के लिए चल रही है। मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, यदि बीएलए को सुनवाई में शामिल किया जाता, तो राज्य की सभी रजिस्टर्ड पार्टियों की मांगें माननी पड़तीं। इसमें छह राष्ट्रीय पार्टियां जैसे भाजपा, कांग्रेस, सीपीआईएम, आप, बसपा और एनपीपी के साथ-साथ तृणमूल और फॉरवर्ड ब्लॉक जैसी दो राज्य पार्टियां शामिल हैं।
इससे हर सुनवाई टेबल पर 11 लोग मौजूद होते – एक ईआरओ, एक एईआरओ, एक माइक्रो ऑब्जर्वर और आठ पार्टियों के बीएलए। सूत्रों ने कहा, ‘इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी से सुनवाई प्रक्रिया असंभव हो जाती। इसलिए सभी पार्टियों के लिए एक समान नियम लागू हैं।’
तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव आयोग ने जानबूझकर उनकी मांग ठुकराई, क्योंकि भाजपा जैसी पार्टियों के पास पर्याप्त बीएलए नहीं हैं। लेकिन आयोग ने स्पष्ट किया कि वह पार्टियों की क्षमता के आधार पर नियम नहीं बदल सकता। ड्राफ्ट मतदाता सूची 16 दिसंबर को जारी हुई थी और फाइनल लिस्ट 14 फरवरी को आएगी। इसके बाद विधानसभा चुनाव की तारीखें घोषित होंगी।
यह फैसला मतदाता सूची रिवीजन प्रक्रिया को सुचारू रखने के लिए महत्वपूर्ण है, जो पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 की तैयारी का हिस्सा है।