
उत्तर प्रदेश के बरसाना में लठमार होली का उत्साह चरम पर है। गलियां रंग-बिरंगे झंडों और फूलों से सजी हुई हैं, वहीं राधा रानी और ठाकुर जी के लिए विशेष वस्त्रों का काम जोरों पर चल रहा है। कुशल कारीगर दिन-रात एक कर इन दिव्य पोशाकों को तैयार कर रहे हैं।
स्थानीय दुकानदार महेश कुमार शर्मा ने बताया कि कान्हा जी और राधा रानी के वस्त्र सिलने में लगभग छह घंटे लगते हैं। ये घरेलू कारीगरों द्वारा बनाए जाते हैं और 30-35 वर्षों से यह परंपरा कायम है। वस्त्रों का आकार भी वर्षों से अपरिवर्तित है, जो इस कला की पवित्रता को दर्शाता है।
24 फरवरी को लड्डू होली के अवसर पर राधा रानी, लड्डू गोपाल, विशाखा और ललिता को नये वस्त्र पहनाए जाएंगे। संजीव अग्रवाल के अनुसार, राधा के वस्त्रों में दरिया, कंचरी और विशेष ओढ़नी शामिल है, जिसे कान्हा भी ओढ़ेंगे। श्रीकृष्ण के लिए जामा, दुपट्टा व पायजामा तैयार हैं। सखियों के लिए अलग डिजाइन हैं। कुल आठ वस्त्र इस बार दिल्ली के अग्रवाल परिवार द्वारा उपलब्ध कराये गये हैं।
लठमार होली की यह अनूठी रस्म पौराणिक कथा पर टिकी है, जिसमें बरसाना की हुरियारिनें नंदगांव के हुरियारों पर लाठियां बरसाती हैं। यह श्रीकृष्ण की राधा भेंट को जीवंत करती है। बरसाना इस होली में भक्तों को आकर्षित करने को तैयार है।