
उत्तर प्रदेश के बरेली में प्रशासनिक हलचल मच गई है। सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे के तुरंत बाद राज्य सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया। 2019 बैच के पीसीएस अधिकारी ने मंगलवार को पत्रकारों के सामने खुलकर जिलाधिकारी पर आरोप लगाए।
अग्निहोत्री ने बताया कि डीएम को एक फोन आया जिसमें उन्हें कहा गया, ‘पंडित पागल हो गया है।’ उन्होंने जोर देकर कहा कि पंडित सनातन संस्कृति का प्रतीक है। ब्राह्मण, कायस्थ, ठाकुर समेत कई समुदायों के लिए यह सम्मानजनक शब्द है। इसे अपमान के रूप में इस्तेमाल करना असहनीय है। यह न केवल व्यक्तिगत आघात है, बल्कि पूरे समाज के साथ अन्याय है।
वे यूजीसी के नए नियमों से भी नाराज हैं, जो सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं और कैंपस में जातिवाद को बढ़ावा दे सकते हैं। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े मामले में भी प्रशासन पर सनातन प्रतीकों का अपमान करने का इल्जाम लगाया। माघ मेला जैसे आयोजनों में स्थानीय अफसरों की भूमिका पर सवाल उठाए।
अग्निहोत्री ने दावा किया कि डीएम के कैंप कार्यालय में उन्हें रात भर बंधक बनाए रखने की कोशिश हुई। छोटे-मोटे सवालों के जवाब में इतना समय क्यों? उन्होंने डीएम से सार्वजनिक स्पष्टीकरण की मांग की। शंकराचार्य ने फोन पर आशीर्वाद देकर उनका हौसला बढ़ाया।
एडीएम सिटी सौरभ दुबे ने सफाई दी कि सोमवार को अग्निहोत्री के घर सभी अधिकारी पहुंचे थे। उनकी परेशानियां सुनीं और आराम करने का सुझाव दिया। लेकिन उन्होंने बार-बार कहा कि हम समझ नहीं पाएंगे।
यह विवाद प्रशासनिक जवाबदेही और सांस्कृतिक संवेदनशीलता पर बहस छेड़ रहा है। क्या यह अधिकारी विद्रोह की शुरुआत है या सिस्टम सुधार का संकेत?