
केंद्रीय राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने मौलाना आजाद नेशनल उर्दू विश्वविद्यालय (MANUU) को जारी नोटिस को सिरे से खारिज करते हुए इसे पूरी तरह अस्वीकार्य करार दिया है। हैदराबाद में आयोजित एक सभा में बोलते हुए भाजपा नेता ने इस कदम को संस्थागत स्वायत्तता पर हमला बताया।
यह विवाद तब भड़का जब उच्च शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालय प्रबंधन को वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं पर सफाई मांगने वाला नोटिस भेजा। संजय ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार देते हुए कहा कि उर्दू शिक्षा को दबाने की साजिश रचने वाले कभी सफल नहीं होंगे। उन्होंने केंद्र सरकार से नोटिस वापस लेने की मांग की।
MANUU, जो 1998 में स्थापित हुआ, उर्दू माध्यम से पेशेवर कोर्स चलाकर हजारों छात्रों को सशक्त बना चुका है। संजय ने जोर देकर कहा कि यह संस्थान अल्पसंख्यक समुदाय की उम्मीदों का प्रतीक है। छात्र संगठनों ने भी विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह मुद्दा आगामी चुनावों में गरमाया रह सकता है। विपक्ष ने संजय पर सांप्रदायिकता भड़काने का आरोप लगाया, जबकि भाजपा इसे अपनी प्रतिबद्धता का प्रमाण बता रही है। शिक्षा मंत्रालय की ओर से अब तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन उच्च स्तरीय बैठक निर्धारित है। यह घटना उच्च शिक्षा में भाषा और राजनीति के संवेदनशील संतुलन को उजागर करती है।