
उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी पर सोमवार को भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल ने भक्तों को अद्भुत शृंगार दर्शन दिए। रात से ही लाइनों में खड़े हजारों श्रद्धालु सुबह चार बजे बाबा के जागरण के साथ दिव्य क्षणों के साक्षी बने।
वीरभद्र द्वारा कपाट खोलने के बाद पंचामृत और फलों के रस से अभिषेक हुआ। फिर भस्म लगाकर माथे पर शांतिप्रद अर्धचंद्र और मोती की बिंदी सजाई गई। त्रिपुंड, भांग व सूखे मेवों से अलंकृत बाबा का स्वरूप देख मंदिर ‘हर हर महादेव’ से गूंज उठा।
प्रतिदिन भस्म आरती में बाबा निराकार रूप से जन्म-मृत्यु के बंधन से मुक्ति प्रदान करते हैं, तो साकार रूप में सज्जन होकर दर्शन देते हैं। प्रत्येक तिथि पर भिन्न शृंगार होता है, जो होली, दिवाली, शिवरात्रि जैसे पर्वों पर भव्य रूप धारण कर लेता है। छह आरतियां व भोग प्रसाद वितरण भक्तों को आनंदित करते हैं।
यह दर्शन भक्तों को शांति का संदेश दे गया, उज्जैन को भक्ति का केंद्र बनाते हुए। महाकाल की कृपा से जीवन के सत्य को समझने का अवसर मिला।