
भारत में बसंत का स्वागत होता है रंग-बिरंगे फूलों और नई ताजगी से, लेकिन आयुर्वेद इस ऋतु को स्वास्थ्य के लिए चुनौतीपूर्ण मानता है। दिन की गर्मी और रात की ठंडक कफ दोष को भड़काती है, जिससे पाचन बिगड़ना, भारीपन और अनिद्रा जैसी शिकायतें आम हो जाती हैं। विशेषज्ञ रात के भोजन में बदलाव की सलाह देते हैं।
सर्दी में जमा कफ बसंत की धूप से पिघलने लगता है। भारी या ठंडे भोजन से यह समस्या बढ़ती है, जिसके परिणामस्वरूप सर्दी-खांसी, कब्ज और मंद पाचन होता है। हल्के, गर्माहट वाले भोजन से कफ नियंत्रित रहता है।
रात के लिए मूंग दाल की खिचड़ी सर्वोत्तम है, जिसमें सोंठ मिलाने से पाचन शक्ति बढ़ती है। मौसमी सब्जियां जैसे लौकी, तोरई, परवल फाइबर प्रदान करती हैं। बाजरे की रोटी सीमित मात्रा में कफ सोखती है।
अदरक-शहद का पानी श्वास मार्ग साफ करता है। मेथी का साग डायबिटीज और जोड़ों के दर्द में राहत देता है। हल्दी दूध एलर्जी रोकता है। जौ सूप, सहजन, पपीता और सोंठ-अजवाइन तड़का भी लाभकारी हैं।
नियम: रात 8 बजे तक भोजन समाप्त करें, ठंडा पानी-दही न लें। इनसे बसंत स्वस्थ रहेगा।