
चिकागो की 22 वर्षीय आयोना विलियम्स एक ऐसी बेटी थीं जिनकी मिसाल आज हर कोई दे रहा है। गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी से जूझते हुए उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन उनके अंगदान के फैसले ने कई परिवारों में नई उम्मीद जगा दी। आयोना के परिवार ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए उनके हृदय, लीवर, किडनी और अन्य अंगों को जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचाया।
आयोना वर्षों पहले ही अंगदाता के रूप में रजिस्टर हो चुकी थीं। नर्सिंग की पढ़ाई कर रही आयोना अस्पतालों में स्वयंसेवा करती थीं और अंगदान के प्रति जागरूकता फैलाती रहती थीं। उनकी मां लीसा ने बताया, ‘वह हमेशा कहती थीं कि जिंदगी बांटने से बढ़ती है।’ डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित करने के बाद तुरंत प्रक्रिया शुरू की। उनका हृदय न्यूयॉर्क में एक पिता को मिला, लीवर टेक्सास और फ्लोरिडा के मरीजों को वितरित हुआ।
अमेरिका में लाखों लोग ट्रांसप्लांट की प्रतीक्षा में हैं। आयोना की कहानी ने स्थानीय स्तर पर अभियान चला दिए हैं। उनके अस्पताल ने उनके नाम पर दान शिविर आयोजित किया। दोस्तों का कहना है कि आयोना की मुस्कान और दया आज भी सबको प्रेरित कर रही है।
परिवार दुख में है लेकिन गर्व भी महसूस कर रहा। आयोना साबित कर गईं कि सच्ची महानता मौत के बाद भी जिंदा रहती है। उनकी बेमिसाल कहानी हर भारतीय बेटी के लिए प्रेरणा है।