
प्रयागराज के माघ मेला में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच 3 जनवरी को हुए विवाद ने अब अयोध्या तक तहलका मचा दिया है। यहां के संत समाज ने शंकराचार्य के पक्ष में खुलकर समर्थन जताया है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
हनुमानगढ़ी सिद्ध पीठ के आचार्य अमित दास महाराज ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि प्रशासन का संत के प्रति यह व्यवहार पूरी तरह गलत था। ‘जगद्गुरु शंकराचार्य के साथ ऐसा अन्याय अस्वीकार्य है। मनगढ़ंत अफवाहों से सीएम और सरकार की छवि खराब करने की साजिश हुई। ब्राह्मणों की शिखा को पकड़ना हमारी सनातन परंपरा का अपमान है। दोषियों पर कार्रवाई जरूरी है।’
उन्होंने सीएम योगी से अपील की कि वे स्वयं जांच करवाएं। हनुमानगढ़ी के देवेशचार्य महाराज ने इसे माघ मेले का काला अध्याय बताया। ‘संतों, शंकराचार्यों और कल्पवासियों से मेला की रौनक आती है। शिखा आस्था का प्रतीक है, इसका अपमान निंदनीय है। प्रशासन को शंकराचार्य का प्रमाण-पत्र मांगने का हक नहीं। यह साजिश है जो सरकार को भी नुकसान पहुंचा रही।’
महंत परमहंस समाधी स्थल के आचार्य नारायण मिश्रा ने कहा कि सभी धार्मिक नेताओं को स्नान का अधिकार है। सरकार ने सभी सुविधाएं दीं, लेकिन कुछ लोग षड्यंत्र रच रहे हैं। ‘योगी जी सभी संतों का सम्मान करते हैं।’
अयोध्या के संतों का यह एकजुट रुख धार्मिक सम्मान और प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़ा करता है।