
असम में युवाओं का एक नया उत्साह देखने को मिल रहा है। राज्य सरकार के स्पष्ट संदेश ‘मेहनत करोगे तो नौकरी मिलेगी’ ने युवाओं के दिलों को छू लिया है। लंबे समय से बेरोजगारी की समस्या से जूझ रहे इस पूर्वोत्तर राज्य में यह बयान उम्मीद की किरण बन गया है।
सरकार ने कौशल विकास योजनाओं, औद्योगिक निवेश और रोजगार मेले के जरिए युवाओं को सशक्त बनाने का बीड़ा उठाया है। गुवाहाटी के रहने वाले राहुल दास जैसे युवा कहते हैं, ‘पहले हम मौके की तलाश में भटकते थे, अब प्रशिक्षण लेकर आगे बढ़ रहे हैं। सरकार का यह दृष्टिकोण सराहनीय है।’
राज्य के श्रम विभाग के आंकड़े बताते हैं कि पिछले तिमाही में युवा प्रशिक्षण पंजीकरण में 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। चाय उद्योग, तेल क्षेत्र और पर्यटन में हजारों नौकरियां पैदा हुई हैं। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में 50,000 से अधिक रोजगार सृजित हो चुके हैं।
हालांकि कुछ आलोचक इसे सरलीकरण बताते हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता और महिला-केंद्रित कार्यक्रमों से बदलाव साफ दिख रहा है। असम अब आर्थिक शक्ति बनने की राह पर है।
युवाओं का यह समर्थन सरकार और जनता के बीच मजबूत सेतु का काम कर रहा है। मेहनत का पुरस्कार मिलेगा—यह संदेश असम के भविष्य को उज्ज्वल बना रहा है।