
असम विधानसभा चुनाव से ठीक पहले विपक्षी एकता की राह में नई बाधा खड़ी हो गई है। गुवाहाटी में गुरुवार को राइजर दल और असम जातीय परिषद (एजेपी) ने महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की, जिसमें कांग्रेस को आमंत्रित नहीं किया गया। यह बैठक सीट बंटवारे और आगे की रणनीति पर केंद्रित रही।
बैठक में राइजर दल के प्रमुख अखिल गोगोई, एजेपी अध्यक्ष लुरिनज्योति गोगोई, दोनों दलों के वरिष्ठ नेता उपस्थित थे। सीपीआई और सीपीआई(एम) के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। इससे गैर-कांग्रेस विपक्ष के मजबूत समन्वय की संभावना जाहिर होती है।
असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भूपेन बोरा के इस्तीफे के बाद विपक्षी खेमे में उथल-पुथल मची हुई है। बैठक के बाद अखिल गोगोई ने कांग्रेस को दो दिनों का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि एकता में दिलचस्पी है तो सीट बंटवारे पर स्पष्टता लाएं। उन्होंने चेतावनी दी, ‘हम अनिश्चितकालीन इंतजार नहीं कर सकते। राइजर दल 46 सीटों पर अकेले लड़ने को तैयार है।’
हालांकि, नेताओं ने व्यापक गठबंधन के द्वार बंद न होने का संकेत दिया। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि कांग्रेस को अलग रखना अविश्वास का प्रतीक है। भाजपा अपनी चुनावी तैयारी में जुटी है, ऐसे में विपक्ष की यह फूट उनके लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है।
आने वाले दिन तय करेंगे कि असम में एकजुट मोर्चा बनेगा या दल बिखर जाएंगे।