
असम विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन एक दिलचस्प राजनीतिक संवाद देखने को मिला। रायजोर दल के नेता और शिवसागर विधायक अखिल गोगोई ने निराशा जताई कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने अपने समापन भाषण में न तो उनका जिक्र किया और न ही उनकी बात सुनी। गुवाहाटी में हुई इस घटना ने सदन की गतिविधियों को रोचक मोड़ दिया।
गोगोई ने स्पष्ट शब्दों में कहा, ‘मैं सदन में मौजूद था, फिर भी मुख्यमंत्री ने मेरी ओर देखा तक नहीं।’ इस शिकायत पर सरमा ने जवाब देते हुए गोगोई के भाषण की तारीफ की, लेकिन साथ ही उन्हें ‘समझदार व्यक्ति’ की तरह आचरण करने और संसदीय मर्यादा का पालन करने की सलाह दी।
मुख्यमंत्री ने गोगोई को आगामी चुनावों के लिए शुभकामनाएं दीं और रायजोर दल की जीत की कामना की। उन्होंने जमीनी आंदोलनों से उभरे नेताओं जैसे गोगोई और वंशानुगत राजनीतिक प्रवेश करने वालों के बीच स्पष्ट भेद बताया। यह टिप्पणी प्रशंसा और आलोचना का मिश्रण लगी।
सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों से प्रतिक्रियाएं आईं, जो सत्र भर चली तीखी बहसों को दर्शाती हैं। अंत में सरमा ने सभी विधायकों को धन्यवाद दिया और स्वस्थ बहस पर जोर दिया। उन्होंने भविष्य के सत्रों में रचनात्मक चर्चाओं की आशा जताई, जो लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक है।