
असम सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसले में चाय बागान जनजातियों और आदिवासी समुदायों के लिए प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी की सरकारी नौकरियों में 3 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने को स्वीकृति प्रदान की है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने मंगलवार को दिसपुर की कैबिनेट बैठक के बाद यह जानकारी साझा की।
यह कदम राज्य के सबसे वंचित वर्गों के उत्थान के लिए सकारात्मक कदम है। अब इन समुदायों को तृतीय-चतुर्थ श्रेणी के अलावा उच्च पदों पर भी अवसर मिलेंगे। सरमा ने कहा कि यह नीति निर्माण और प्रशासन में इन युवाओं की मजबूत उपस्थिति सुनिश्चित करेगा।
चाय उद्योग में इनका योगदान असम की अर्थव्यवस्था का आधार है, फिर भी वरिष्ठ पदों पर प्रतिनिधित्व न्यून रहा। यह आरक्षण शिक्षित युवाओं के लिए द्वार खोलेगा, उच्च शिक्षा को बढ़ावा देगा और सामाजिक-आर्थिक विषमताओं को कम करेगा।
अन्य फैसलों में 2026-27 के प्रारंभिक वोट-ऑन-अकाउंट बजट, एमएमयूए योजना के तहत 1,07,532 अतिरिक्त महिलाओं को प्रारंभिक पूंजी, कार्बी आंगलोंग में दूसरा सैनिक विद्यालय, धेमाजी में 31 बीघा से अधिक भूमि क्रिकेट संघ को, जोरहाट के बोरभेटी के लिए 20 करोड़ का पर्यटन विकास शामिल है।
स्कूल शिक्षकों का अर्जित अवकाश 15 दिन बढ़ाया गया और कृषि सेवा नियमों में पदोन्नति सरलीकृत। सरमा ने इन्हें सामाजिक न्याय, रोजगार, अवसंरचना और समावेशी विकास का प्रतीक बताया।