
प्रयागराज में बुधवार को आध्यात्मिक गुरु आशुतोष ब्रह्मचारी ने एक प्रेस वार्ता में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए सनसनी फैला दी। उन्होंने आश्रमों में युवा बटुकों के साथ दुर्व्यवहार का खुलासा किया और कई नामों का उल्लेख किया।
ब्रह्मचारी ने कहा, ‘जो गंगा मां को गंदा बताते हैं, वे उसमें स्नान नहीं कर सकते।’ उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से लाए गए बटुकों के आश्रमों में बुरे बर्ताव का दावा किया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दो बटुकों की मेडिकल जांच हुई, जिसमें छेड़छाड़ के संकेत मिले।
आरोपियों में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी, अरविंद और प्रकाश उपाध्याय के नाम लिए गए। उन्होंने ‘शंकराचार्य’ शब्द के इस्तेमाल पर कोर्ट की अवमानना का खतरा बताया।
यह प्रेस कॉन्फ्रेंस स्पेशल पॉक्सो कोर्ट के स्वामी के खिलाफ नाबालिग शोषण के FIR आदेश के ठीक बाद हुई, जो ब्रह्मचारी की शिकायत पर आधारित थी। पुलिस को जांच के निर्देश दिए गए हैं।
ब्रह्मचारी ने आश्रम के अन्य अनुयायियों और समाजवादी पार्टी-कांग्रेस के सदस्यों को भी संदिग्ध ठहराया। 18 जनवरी को बटुकों के भागने का जिक्र किया और संगम पहुंचाने में रुकावट का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, ‘मैं ऐसे लोगों को बेनकाब करता हूं, खुद उनमें शामिल नहीं।’ यह विवाद धार्मिक जगत में सनातन परंपराओं और नैतिकता पर सवाल खड़े कर रहा है। जांच आगे बढ़ने से सच्चाई सामने आएगी।