
नई दिल्ली: प्रगति मैदान में चल रहे विश्व पुस्तक मेले में आज थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने दौरा किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ‘भारत का भविष्य हमारी युवा पीढ़ी में निहित है।’ यह दौरा न केवल सैन्य नेतृत्व की साहित्य के प्रति रुचि दर्शाता है, बल्कि राष्ट्र निर्माण में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका को भी रेखांकित करता है।
मेले के विभिन्न स्टालों का जायजा लेते हुए सेना प्रमुख ने प्रकाशकों, लेखकों और युवा पाठकों से गहन संवाद किया। विशेष रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा, इतिहास और नेतृत्व पर आधारित पुस्तकों वाले स्टालों में उनकी रुचि अधिक रही।
दो घंटे से अधिक समय तक चले इस दौरे के दौरान जनरल द्विवेदी ने छात्रों को किताबों के माध्यम से रणनीतिक चिंतन विकसित करने की सलाह दी। ‘ज्ञान ही वह शक्ति है जो हमें मजबूत बनाती है,’ उन्होंने युवाओं को प्रेरित किया।
यह पहल भारतीय सेना के उन प्रयासों का हिस्सा है जो युवा पीढ़ी को प्रेरित करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे हैं। सैन्य इतिहास और रणनीति की पुस्तकें खरीदते हुए उन्होंने छात्रों के साथ सेल्फी भी ली।
विश्व पुस्तक मेला अपनी 32वीं संस्करण में 1000 से अधिक प्रकाशकों की भागीदारी के साथ लाखों पाठकों को आकर्षित कर रहा है। सेना प्रमुख के इस दौरे ने आयोजन को नई ऊंचाई प्रदान की है।
उनके संदेश ने ‘विकसित भारत 2047’ के दृष्टिकोण को बल दिया है। युवाओं को शिक्षित और सशक्त बनाने पर जोर देते हुए जनरल द्विवेदी ने कहा कि राष्ट्र का भविष्य उसी की युवा शक्ति पर निर्भर करता है।
मेले के समापन तक यह दौरा चर्चा का विषय बना रहेगा। युवा पाठकों के बीच सैन्य साहित्य के प्रति नई रुचि जागृत हुई है।