
नई दिल्ली। थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बुधवार को नेशनल वॉर मेमोरियल पर ‘भारत रणभूमि दर्शन अभियान’ का औपचारिक समापन किया। यह 3,400 किलोमीटर लंबी यात्रा गुजरात के द्वारका से 3 फरवरी को शुरू होकर कच्छ का रण, थार मरुस्थल समेत राजस्थान-गुजरात के महत्वपूर्ण युद्धक्षेत्रों और सीमावर्ती चौकियों से गुजरी।
आर्टिलरी रेजिमेंट के नेतृत्व में 35 सदस्यीय दल ने नई सड़कों और संपर्क सुविधाओं का जायजा लिया, जो सेना की रणनीति और सीमांतवासियों के लिए वरदान साबित हो रही हैं। यात्रा में पश्चिमी मोर्चे के स्मारकों पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। वीरांगनाओं, पूर्व सैनिकों, एनसीसी कैडेट्स, छात्रों और स्थानीय निवासियों से संवाद किया गया। हर पड़ाव पर स्थानीय प्रशासन और जनता ने भव्य स्वागत किया।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, अभियान का लक्ष्य ऐतिहासिक रणभूमियों को जन-जन से जोड़ना और नई पीढ़ी को बलिदान की कहानियां सुनाना था। जनरल द्विवेदी ने कहा कि यह पहल देश के गौरवशाली अतीत को जीवंत रखती है और युवाओं को राष्ट्ररक्षा के लिए प्रेरित करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सशस्त्र बलों का अतीत से वर्तमान और भविष्य को जोड़ने का प्रयास है।
