
नई दिल्ली में गुरुवार को कूटनीतिक हलचल तेज हो गई जब अरब देशों की लीग (एलएएस) के महासचिव अहमद अबुल घीत द्वितीय भारत-अरब विदेश मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक में भाग लेने पहुंचे। विदेश मंत्रालय ने मिस्र के इस वरिष्ठ राजनयिक का हार्दिक स्वागत किया, जो दोनों पक्षों के मजबूत रिश्तों का प्रतीक है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए कहा, ‘लीग ऑफ अरब स्टेट्स के महासचिव अहमद अबुल घीत का नई दिल्ली में स्वागत करते हुए प्रसन्नता हो रही है। वे दूसरी भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक और इससे जुड़ी चर्चाओं के लिए आए हैं। अगले दो दिनों में होने वाली ये उच्च स्तरीय वार्ताएं सभी क्षेत्रों में भारत-अरब साझेदारी को मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता दर्शाती हैं।’
इससे पहले कोमोरोस के विदेश मंत्री मबे मोहम्मद, फिलिस्तीन के वारसेन अगाबेकियन शाहीन और सूडान के मोहिएलदीन सलीम अहमद इब्राहिम भी इस बैठक के लिए राजधानी पहुंच चुके थे। यह संयुक्त मंच क्षेत्रीय सहयोग को नई दिशा देने वाला है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत-अरब विदेश मंत्रियों की यह बैठक साझेदारी को बढ़ावा देने वाला प्रमुख संस्थागत ढांचा है। मार्च 2002 में भारत और एलएएस के बीच हस्ताक्षरित एमओयू ने संवाद प्रक्रिया को औपचारिक रूप दिया। दिसंबर 2008 में तत्कालीन महासचिव अमरे मूसा के दौरे पर अरब-भारत सहयोग मंच के लिए दूसरा एमओयू साइन हुआ, जिसे 2013 में पुनर्गठित किया गया। भारत 22 सदस्यीय इस पैन-अरब संगठन का पर्यवेक्षक है।
ये बैठकें व्यापार, सुरक्षा, संस्कृति और विकास जैसे मुद्दों पर सहमति बनाती हैं। वैश्विक परिवर्तनों के बीच यह मंच आर्थिक एकीकरण, ऊर्जा सुरक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करेगा, जिससे दोनों क्षेत्रों का भविष्य उज्ज्वल होगा।