
ओस्कर विजेता संगीतकार एआर रहमान के एक बयान ने पूरे देश में हंगामा मचा दिया है। उन्होंने हिंदी सिनेमा को ‘कम्युनल’ करार देते हुए कहा कि बॉलीवुड की कहानियां अब धार्मिक विभाजन को बढ़ावा दे रही हैं। इस बयान पर संत समाज भड़क पड़ा और रहमान को ‘जिहादी’ बता दिया।
हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान रहमान ने कहा, ‘हिंदी सिनेमा कम्युनल हो गया है। फिल्में धार्मिक आधार पर समाज को बांटने वाली थीम्स को बढ़ावा दे रही हैं।’ उनके इस कथन ने सोशल मीडिया पर तूफान ला दिया।
वाराणसी में संतों ने प्रेस कॉन्च्रेंस कर रहमान की आलोचना की। एक प्रमुख संत ने कहा, ‘यह जिहादी मानसिकता है जो हमारे सिनेमा को बदनाम करना चाहती है।’ मुंबई और चेन्नई में उनके घरों के बाहर विरोध प्रदर्शन हुए।
रहमान की स्लमडॉग मिलियनेयर और रजिस्थान जैसी फिल्मों के गीतों ने उन्हें विश्व पटल पर पहचान दिलाई। समर्थक उनका साथ दे रहे हैं, लेकिन विरोधियों का रोष बढ़ता जा रहा है।
फिल्म इंडस्ट्री में चुप्पी साधे हुए हैं। क्या यह विवाद रहमान के भविष्य पर असर डालेगा? राजनीतिक दल भी इस मुद्दे पर नजर रखे हुए हैं। यह घटना भारतीय सिनेमा की मौजूदा दशा पर सवाल उठाती है।