
छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में बस्तर पंडुम उत्सव के समापन पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने माओवादियों से हथियार डालकर विकास की राह अपनाने की भावुक अपील की। आदिवासी सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि नक्सलवाद के विरुद्ध संघर्ष व्यक्तिगत नहीं, बल्कि आदिवासी बस्तियों की रक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए है।
शाह ने सरेंडर करने वालों को राज्य की उदार पुनर्वास योजना का लाभ दिलाने का भरोसा दिया, जिसके तहत 2500 से अधिक लोग पहले ही हिंसा का परित्याग कर चुके हैं। लेकिन आईईडी बिछाने, गांवों पर हमले या स्कूल तोड़ने वालों को कठोरतम सजा का आश्वासन भी दिया। माओवाद ने केवल तबाही मचाई है, हिंसा का डटकर मुकाबला होगा।
बस्तर के चमत्कारी परिवर्तन पर गौर करते हुए शाह ने कहा कि दशकों बंद पड़े स्कूल अब गूंज रहे हैं। पांच वर्षों में यह छत्तीसगढ़ का सर्वाधिक विकसित संभाग बनेगा। 27 दिसंबर तक हर गांव में बिजली, मोबाइल, अस्पताल, महाविद्यालय, डाकघर जैसी सुविधाएं पहुंचेंगी।
आदिवासी किसानों का धान सरकार खरीगेगी, मुफ्त चावल, गैस सिलेंडर, नल का पानी मिलेगा। नक्सल उन्मूलन के बाद एडवेंचर टूरिज्म, होमस्टे, कैनोपी वॉक, ग्लास ब्रिज जैसे क्षेत्र फलेंगे-फूलेंगे।
शाह ने कई योजनाओं का उद्घाटन किया: 118 एकड़ औद्योगिक क्षेत्र, इंद्रावती पर सिंचाई व 120 मेगावाट बिजली परियोजना, 3500 करोड़ की रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन, नदी जोड़ो अभियान, 90 हजार युवाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण।
कर्फ्यू के साये से रात्रियों में मुस्कान और सांस्कृतिक उल्लास तक का सफर बस्तर के सामाजिक पुनरुत्थान को दर्शाता है। शाह ने अबूझमाड़िया, मुरिया, गोंड आदि जनजातियों की समृद्ध विरासत की सराहना की, जिनकी भाषाएं, सुर कासर, रेला, घोटुल जैसे नृत्य प्राचीन हैं।
बस्तर पंडुम की प्रशंसा करते हुए उन्होंने 12 श्रेणियों में शीर्ष टीमों को राष्ट्रपति भवन में प्रदर्शन व भोज का न्योता दिया। सुरक्षा बलों को नक्सल युद्ध में बलिदान के लिए श्रद्धांजलि दी।