
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घोषणा की है कि राष्ट्रीय एकीकृत लापता और संदिग्ध व्यक्तियों का डेटाबेस (एनआईडीएमएस) आतंकवाद के विरुद्ध भारत का नेक्स्ट जेनरेशन सुरक्षा कवच बनेगा। नई दिल्ली में आयोजित आंतरिक सुरक्षा पर उच्च स्तरीय सम्मेलन में शाह ने कहा कि यह प्लेटफॉर्म आतंकी गतिविधियों को पहले ही रोकने में सक्षम होगा।
वर्तमान में 20 लाख से अधिक रिकॉर्ड्स के साथ कार्यरत एनआईडीएमएस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग का समावेश किया जाएगा। इससे चेहरे की पहचान, भविष्यवाणी विश्लेषण और अंतरराज्यीय डेटा तुलना संभव हो सकेगी। शाह ने बताया कि जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर में एनआईडीएमएस ने कई आतंकी मॉड्यूल्स का पर्दाफाश किया है।
मंत्री ने सभी राज्यों को मार्च 2025 तक पुलिस डेटाबेस का शत-प्रतिशत एकीकरण करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा, ‘आतंकवादी गुमनामी और गतिशीलता पर निर्भर करते हैं, एनआईडीएमएस इन्हें छीन लेगा।’ गोपनीयता संबंधी चिंताओं को खारिज करते हुए शाह ने राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताई।
अंतरराष्ट्रीय डेटाबेस से लिंकिंग के साथ यह सिस्टम सीमा-पार आतंकवाद पर नकेल कसेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि शाह का यह विजन भारत की आंतरिक सुरक्षा को अभेद्य बना देगा। आतंक के नए-नए खतरे झेल रहे भारत के लिए एनआईडीएमएस एक क्रांतिकारी कदम साबित होगा।