
केरल विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा को बड़ा झटका लगने वाला है या फिर नया रंग जमने वाला है, ये तो वक्त बताएगा। लेकिन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरे से निश्चित रूप से पार्टी में उत्साह की लहर है। शाह केरल में भाजपा के आधिकारिक प्रचार अभियान की शुरुआत करने वाले हैं।
दक्षिण भारत का यह राज्य लंबे समय से वाम मोर्चा और कांग्रेस गठबंधन के बीच झूलता रहा है। लेकिन भाजपा ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी जड़ें मजबूत की हैं। 2021 के चुनाव में पार्टी को 13 प्रतिशत से अधिक वोट मिले थे। अब शाह के नेतृत्व में लक्ष्य है विधानसभा की 140 सीटों पर मजबूत चुनौती पेश करना।
शाह का दौरा रणनीतिक है। वे कार्यकर्ताओं को प्रेरित करेंगे, उम्मीदवारों से रूबरू होंगे और जनसभाओं में सरकार की नाकामियों पर प्रहार करेंगे। बेरोजगारी, आर्थिक मंदी और सामाजिक तनाव जैसे मुद्दों पर भाजपा केंद्र की योजनाओं का श्रेय लेगी।
लेफ्ट सरकार पर हमला बोलते हुए शाह केंद्रीय सहायता के बावजूद राज्य की लापरवाही उजागर करेंगे। पार्टी का फोकस हिंदू एकजुटता, विकास और सुरक्षा पर रहेगा। युवा और महिलाओं को लक्षित अभियान चलाया जाएगा।
विपक्षी दल सतर्क हैं। सीपीआई(एम) इसे सांप्रदायिक साजिश बता रहा है, जबकि कांग्रेस अपनी कमजोरियों पर पर्दा डालने की कोशिश करेगी। लेकिन शाह की चाणक्य नीतियां सबको चुनौती दे रही हैं।
केरल की 140 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा का एकमात्र विधायक भी उत्साहित है। यह अभियान न केवल चुनावी जंग है, बल्कि राज्य की राजनीति में नया अध्याय लिखने की कोशिश है। शाह के दौरे से भाजपा को अपेक्षित उछाल मिलेगा।
