
आम आदमी पार्टी की नेता अलका लांबा ने आज स्पष्ट शब्दों में कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंपना जनता के आंदोलन का सीधा परिणाम है। उत्तराखंड में बीते साल हुई इस सनसनीखेज घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था, जहां एक पूर्व बीजेपी मंत्री के बेटे के स्वामित्व वाले रिसॉर्ट में 19 वर्षीय रिसेप्शनिस्ट की निर्मम हत्या कर दी गई। लांबा ने जोर देकर कहा कि यह सरकारी दया नहीं, बल्कि आम लोगों की एकजुट आवाज का कमाल है।
पौड़ी गढ़वाल की रहने वाली अंकिता को सितंबर 2022 में रिसॉर्ट मालिकों द्वारा कथित तौर पर चिल्ला नहर में धक्का देकर मार दिया गया। इसके बाद राज्य भर में विरोध प्रदर्शन भड़क उठे। परिवार, कार्यकर्ता और विपक्षी दल ‘अंकिता को न्याय दो’ के नारे के साथ सड़कों पर उतरे। स्थानीय पुलिस की जांच पर छेड़छाड़ और सुस्ती के आरोप लगे, जिससे सीबीआई जांच की मांग तेज हो गई।
देहरादून में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लांबा ने कहा, ‘यह जन आंदोलन की विजय है।’ उन्होंने हजारों लोगों के धरना, मार्च और पुलिस बैरिकेड तोड़ने की कहानियां सुनाईं। उन्होंने राज्य सरकार पर सीबीआई सौंपने में देरी का आरोप लगाते हुए इसे ‘सामने बचाव का उपाय’ बताया। अक्टूबर 2023 में हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद ही यह कदम उठा।
लांबा ने बीजेपी के रिश्तेदार पुलकित आर्य पर निशाना साधा, जिन्हें शुरू में प्रभावशाली कनेक्शनों से बचाव मिला। सीबीआई ने अब गवाहों को तलब किया है और फोरेंसिक जांच तेज कर दी है। ‘दोषियों को सजा मिले, इसके लिए जनता सतर्क रहेगी,’ उन्होंने आश्वासन दिया।
यह घटना लोकतंत्र में सामूहिक शक्ति को रेखांकित करती है। सीबीआई की गहन जांच से शुरुआती खामियां उजागर हो सकती हैं। अंकिता की कहानी ग्रामीण इलाकों में महिलाओं की असुरक्षा की याद दिलाती है। लांबा के बयान से भविष्य के मामलों में जन आंदोलनों को बल मिलेगा।