
लखनऊ में शनिवार को आयोजित प्रेस वार्ता में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद को आधार बनाकर योगी सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी गंभीर सवाल खड़े करते हुए कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर खुलकर बोला।
कालनेमि का जिक्र करते हुए अखिलेश ने कहा कि जो कलनेमि को याद करते हैं, वे कलियुग के कालनेमि बताएं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार धर्म को राजनीतिक हथियार बना रही है। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में पारदर्शिता की कमी पर निशाना साधते हुए पूछा कि वोटरों को नोटिस क्यों दिए जा रहे हैं और राजनीतिक दलों को इसकी जानकारी क्यों नहीं?
चुनाव आयोग सरकार के इशारों पर काम कर रहा है, अधिकारियों द्वारा चुनावी धांधली हो रही है। उपचुनावों में वोट लूटे गए, सीसीटीवी फुटेज मौजूद होने पर भी ईसी ने उसे किसी दल को नहीं सौंपा। बीएलओ ट्रेनिंग में मौतें हुईं, लेकिन कोई जिम्मेदारी नहीं तय हुई।
कन्नौज सदर में 200 फर्जी वोटर मिले, डुप्लीकेट एंट्री का खेल चल रहा है। अखिलेश ने आधार से वोटर लिस्ट जोड़ने और डुप्लीकेट हटाने की मांग दोहराई। एसआईआर को एनआरसी जैसा बताते हुए कहा कि जनता में भ्रम फैलाया जा रहा है।
शंकराचार्य से एसपी का संपर्क जारी है, वे सच्चे सनातनी हैं, सरकार संयम बरते। जातिगत जनगणना अधूरी है। कन्नौज में एसपी के काऊ मिल्क प्लांट को बंद किया गया, जो देश का पहला था। भाजपा गौसेवा का दिखावा कर रही। एसपी सत्ता में आई तो गाय का दूध खरीदकर बांटेगी।
नोएडा हादसे पर डायल-100 कमजोर करने का आरोप, बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई हो। कोविड वैक्सीन के बाद की मौतों के आंकड़े सार्वजनिक हों। केजीएमयू मजार पर तंज कसते हुए कहा कि पूरा संस्थान हटा दें, क्योंकि इसे ईसाई ने बनाया।