
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार पर जमकर हमला बोला है। उन्होंने इसे 20 साल पुराने मामले को उछालकर संत को अपमानित करने की साजिश करार दिया।
रविवार को सपा मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश ने कहा कि विचारधारा में भिन्नता स्वाभाविक है, लेकिन इस हद तक जाकर संत पर कीचड़ उछालना निंदनीय है। उन्होंने कहा, अगर शिकायतकर्ता किसी अन्य संत के शिष्य हैं तो मेरी भूल हुई कि मैंने पहले दर्ज केस वापस लिया।
दरअसल, कोर्ट के आदेश पर यूपी पुलिस ने शंकराचार्य, उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद ब्रह्मचारी व अन्य के खिलाफ बाल शोषण के आरोप में मुकदमा दर्ज किया है। अखिलेश ने इसे माघ मेले से जोड़ा जहां शंकराचार्य को गंगा स्नान से रोका गया। ठंड में कई दिनों तक धरना देने के बावजूद सम्मान न मिलना दुखद है।
भाजपा पर चुनावी माहौल बिगाड़ने का आरोप लगाते हुए अखिलेश ने कहा कि पहले मंदिरों में मांस फेंकने के मामलों में भाजपा नेता जेल गए थे। सोशल मीडिया पर फर्जी वीडियो से तनाव फैलाने की चालें चल रही हैं, जनता सावधान रहे।
अखिलेश ने गोमती-हिंडन सफाई योजनाओं को ठप होने और अंडरग्राउंड पाइपलाइन को भ्रष्टाचार की पाइपलाइन बताया। बुंदेलखंड से लखनऊ तक लागत दोगुनी हो गई। सीएम के जापान दौरे पर तंज कसते हुए बोले, जापान जा रहे हैं लेकिन क्योटो नहीं। महाभारत के कर्ण का जिक्र कर सामाजिक न्याय पर प्रहार किया।
अंत में अखिलेश ने कहा कि जनता ने इस सरकार को दिल से ठुकरा दिया है, बस वोट डालने का इंतजार है। यह बयान सपा की आक्रामक रणनीति का संकेत देता है।