
महाराष्ट्र की सियासत में भूचाल मचाने वाले बयान के साथ डिप्टी सीएम अजीत पवार ने सिंचाई विभाग में हुए कथित घोटाले पर पर्दा उठाया है। लगभग 25 साल तक जलसंसाधन मंत्री रहते हुए पवार ने स्वीकार किया कि कई परियोजनाओं के खर्चे हजारों करोड़ बढ़ गए, जो मूल अनुमान से कहीं ज्यादा थे।
पवार ने कहा कि जल्दबाजी में लिए फैसलों से गड़बड़ियां हुईं, लेकिन अब सुधार की जरूरत है। यह बयान विधानसभा चुनावों से ठीक पहले आया है, जिससे विपक्ष में हड़कंप मच गया। भाजपा ने इसे सुनते ही हमला बोला। देवेंद्र फडणवीस ने सवाल उठाया कि 25 साल तक चुप क्यों रहे? क्या वे खुद इसमें शामिल थे?
महाराष्ट्र में सूखे की मार झेल रहे किसानों के लिए सिंचाई परियोजनाएं वरदान साबित होनी थीं, लेकिन कथित भ्रष्टाचार ने सब बर्बाद कर दिया। इटापुर बांध, विदर्भ जैसी योजनाओं में करोड़ों के फंड गायब होने के आरोप सालों से लगे आ रहे हैं। पवार की एनसीपी अब भाजपा के साथ सत्ता में है, लेकिन पुराने घाव फिर हरे हो गए हैं।
एनजीओ और किसान संगठन जांच की मांग कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी है। क्या यह पवार का छवि सुधारने का प्रयास है या सच्ची पारदर्शिता? आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति और रोचक होने वाली है।
