
नई दिल्ली में एआईएमआईएम की दिल्ली इकाई के प्रमुख शोएब जमई ने रमजान के पवित्र महीने में सरकारी दफ्तरों में तैनात मुस्लिम कर्मचारियों के लिए विशेष छूट की मांग उठाई है। उन्होंने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से अपील की है कि शाम को ट्रैफिक जाम से बचने के लिए इन कर्मचारियों को जल्दी ड्यूटी से मुक्त किया जाए। जमई का कहना है कि इससे समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा और धार्मिक भावनाओं का सम्मान होगा।
शोएब जमई ने विशेष बातचीत में बताया, ‘रमजान में हर मुसलमान की चाहत होती है कि वह घर जाकर परिवार के साथ इफ्तार करे। लेकिन दिल्ली की भयंकर ट्रैफिक जाम इसकी राह में सबसे बड़ी बाधा बन जाती है। इसलिए ड्यूटी समय में छूट देकर इन कर्मचारियों को समय पर घर लौटने का मौका मिलना चाहिए।’
लुधियाना विश्वविद्यालय में कश्मीरी छात्रों के इफ्तार विवाद पर जमई ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा, ‘इन छात्रों का क्या कसूर? वे पूरे देश के कोने-कोने में पढ़ाई कर रहे हैं। साउथ से नॉर्थ तक, जामिया तक। रोजा और इफ्तार हमारा धार्मिक कर्तव्य है। जब अन्य धर्मों के त्योहार मनाए जाते हैं, तो इसमें क्या समस्या?’
बिहार में मीट-मछली की खुली बिक्री पर रोक के मुद्दे पर जमई ने साफ किया, ‘यह स्वच्छता का प्रश्न है। लेकिन वास्तविकता यह है कि देश के 90 प्रतिशत हिंदू मांसाहारी भोजन ग्रहण करते हैं। इसे धार्मिक रंग न दिया जाए।’
इधर, एआई समिट में यूथ कांग्रेस के हंगामे की जमई ने निंदा की। उन्होंने कहा, ‘लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की छवि खराब करना उचित नहीं। मैं खुद समिट में अपनी एआई टीम के साथ रिसर्चर के रूप में मौजूद था। व्यवस्था की आलोचना हुई, लेकिन प्रदर्शन का स्थान वहां नहीं था।’
जमई की यह मांग दिल्ली जैसे महानगर में धार्मिक समावेशिता की दिशा में एक कदम हो सकती है। सरकार का फैसला देखना बाकी है।