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अहमदाबाद प्रॉपर्टी स्कैम: बिल्डर कमलेश गोंडालिया पर FIR, राकेश लाहोटी ने खोला मोर्चा

अहमदाबाद के जाने-माने व्यवसायी राकेश लाहोटी ने बिल्डर कमलेश गोंडालिया, उनके परिवारजनों और संबंधित फर्मों के खिलाफ करोड़ों रुपये के प्रॉपर्टी स्कैम का पर्दाफाश करते हुए औपचारिक एफआईआर दर्ज कराई है।...

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Lok Shaktiसंवाददाता (Reporter)
|भारत|
October 17, 2025
अहमदाबाद प्रॉपर्टी स्कैम: बिल्डर कमलेश गोंडालिया पर FIR, राकेश लाहोटी ने खोला मोर्चा
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अहमदाबाद के जाने-माने व्यवसायी राकेश लाहोटी ने बिल्डर कमलेश गोंडालिया, उनके परिवारजनों और संबंधित फर्मों के खिलाफ करोड़ों रुपये के प्रॉपर्टी स्कैम का पर्दाफाश करते हुए औपचारिक एफआईआर दर्ज कराई है। गायकवाड़ हवेली स्थित डीसीपी क्राइम ऑफिस में दर्ज कराई गई शिकायत में 'जाली दस्तावेज़ों, बार-बार संपत्ति की बिक्री, वित्तीय धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात' जैसी गतिविधियों का आरोप लगाया गया है।

एफआईआर के अनुसार, 2019 से 2025 के बीच, राकेश लाहोटी ने अपनी कंपनियों क्लियरस्काई ट्रेडलिंग एलएलपी और राकेश इन्वेस्टमेंट कंपनी के माध्यम से अहमदाबाद और खेडा जिलों में विभिन्न उच्च-मूल्य वाली संपत्तियों की खरीद के लिए कमलेश गोंडालिया और उनके परिवार के साथ कानूनी रूप से निष्पादित 'एग्रीमेंट टू सेल' (बिक्री समझौते) किए थे।

इन संपत्तियों में एलिसब्रिज स्थित तक्षशिला एलेग्ना के छह फ्लैट, नायका, खेडा (सर्वे नंबर 390–397) में भूमि के टुकड़े, अम्बली (फाइनल प्लॉट नंबर 21, टीपी 215) में एक बंगला, और बोपल स्थित ट्रेजर एन्क्लेव (यूनिट बी-19 और बी-20) के दो फ्लैट शामिल थे।

लाहोटी का आरोप है कि इन संपत्तियों के लिए 100% भुगतान करने के बावजूद, उन्हें कभी भी कब्ज़ा नहीं सौंपा गया और न ही उनके पक्ष में स्वामित्व दस्तावेज निष्पादित किए गए।

इसके बजाय, जांच में पता चला कि गोंडालिया समूह द्वारा आरईआरए (RERA) पोर्टल पर इन संपत्तियों को 'अनबुक्ड' (बिना बिक्री के) दिखाया गया था, जबकि आंतरिक पारिवारिक हस्तांतरण और नई बिक्री लेनदेन किए गए थे ताकि उसी संपत्ति को गिरवी रखा जा सके या अन्य अनजान खरीदारों और वित्तीय संस्थानों को बेचा जा सके।

एफआईआर में यह भी कहा गया है कि जून 2025 में, इस कथित घोटाले को छिपाने के हताश प्रयास में, कमलेश गोंडालिया ने लाहोटी के बैंक खाते में 3 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए, जिसे उन्होंने 'ऋण भुगतान' बताया। लाहोटी का कहना है कि यह एक छद्म लेनदेन था जिसका उद्देश्य धोखाधड़ी को छुपाना और सौदों को जबरन 'बंद' करना था।

लाहोटी के अनुसार, जब उनसे इस बारे में बात की गई, तो गोंडालिया ने कथित तौर पर धमकी दी और झूठे प्रति-शिकायतें दर्ज कराकर उन्हें डराने की कोशिश की। एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 111, 316, 318(4), 321, 223, 329 और 336 के तहत गंभीर उल्लंघनों का उल्लेख है, जो धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक विश्वासघात और संगठित वित्तीय अपराध से संबंधित हैं।

राकेश लाहोटी ने क्राइम डिटेक्शन ब्रांच, पुलिस आयुक्त और आरईआरए अधिकारियों को पंजीकृत समझौते, बैंक हस्तांतरण रिकॉर्ड और कानूनी नोटिस सहित पर्याप्त दस्तावेजी सबूत सौंपने का दावा किया है। उन्होंने पुलिस से कमलेश गोंडालिया और उनके सहयोगियों द्वारा चलाए जा रहे 'भ्रष्ट' नेटवर्क की पूर्ण पैमाने पर जांच शुरू करने की मांग की है।

लाहोटी ने कहा, "यह सिर्फ अनुबंध का उल्लंघन नहीं है; यह एक सोची-समझी धोखाधड़ी है। हमें वैध स्वामित्व और पारदर्शी सौदों के सपने दिखाए गए थे। इसके बजाय, गोंडालिया परिवार ने हमारा पैसा लिया, हमारे भरोसे को तोड़ा, और जो हमारा है उसे deny करने के लिए हर चाल चली। यह व्यापार नहीं, यह दिनदहाड़े लूट है।"

लाहोटी ने डीसीपी क्राइम कार्यालय से आग्रह किया है कि वे आगे की बिक्री को रोकने के लिए विवादित संपत्तियों को फ्रीज करने के लिए त्वरित कार्रवाई करें। उन्होंने आरईआरए और वित्तीय संस्थानों से कमलेश गोंडालिया और उनके परिवार से जुड़ी सभी परियोजनाओं का फोरेंसिक ऑडिट करने का भी आग्रह किया है।

लाहोटी ने आगे कहा, "यह संगठित संपत्ति धोखाधड़ी का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। अगर ऐसे बिल्डरों को नहीं रोका गया, तो आम नागरिक खुद रियल एस्टेट प्रणाली में विश्वास खो देंगे।"

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