
दिल्ली विधानसभा के बाहर सोमवार को हंगामा मच गया जब निलंबित आम आदमी पार्टी (आप) के विधायकों को प्रवेश करने से रोक दिया गया। विधायक अपनी मांगों को लेकर जोरदार नारेबाजी करते हुए पहुंचे थे, लेकिन सुरक्षा बलों ने उन्हें अंदर जाने नहीं दिया।
आप के ये विधायक लंबे समय से निलंबन के खिलाफ लड़ रहे हैं। उनका कहना है कि भाजपा उन्हें विधानसभा के कार्यालयों तक पहुंचने से रोककर लोकतंत्र की हत्या कर रही है। ‘हम दिल्ली की जनता के प्रतिनिधि हैं, भाजपा हमें अपने कर्तव्य से नहीं रोक सकती,’ एक विधायक ने कहा।
यह घटना दिल्ली की राजनीति में चल रहे तनाव को दर्शाती है। आप सरकार का आरोप है कि केंद्र की भाजपा सरकार ने सदन की कार्यवाही बाधित करने के बहाने इन विधायकों को निलंबित किया ताकि केजरीवाल सरकार को कमजोर किया जा सके। सदन अध्यक्ष ने निलंबन को सदन के नियमों के अनुरूप बताया है।
निलंबित विधायकों की संख्या 12 से अधिक है। वे दावा कर रहे हैं कि निलंबन के कारण वे अपने क्षेत्रों के विकास कार्यों में हिस्सा नहीं ले पा रहे। भाजपा नेताओं ने इसे आप की नौटंकी करार दिया और कहा कि सदन में व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है।
आप ने इसके खिलाफ धरना और अदालती लड़ाई का ऐलान किया है। आने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए यह मुद्दा दोनों दलों के बीच जंग को तेज कर सकता है। दिल्ली की जनता इस राजनीतिक ड्रामे को करीब से देख रही है, जहां लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई तेज हो गई है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना आप को अपने समर्थकों को एकजुट करने का मौका देगी। भाजपा को भी इसका जवाब देना होगा। दिल्ली में केंद्र-राज्य संबंधों की जटिलताओं के बीच यह संघर्ष लंबा चल सकता है।