
रंगों की बहार लेकर 4 मार्च को होली का त्योहार धूमधाम से मनाया जाएगा। पूरे देश में उत्साह चरम पर है, लेकिन रासायनिक रंगों और असंतुलित भोजन से स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकते हैं। आयुर्वेद इन 5 आसान उपायों से त्योहार को खुशहाल और निरोग बनाता है।
केमिकल रंग त्वचा को झुलसा सकते हैं, आंखों में जलन पैदा कर सकते हैं तथा भारी खानपान से अपच हो सकता है। प्राकृतिक विधियों से इन सबका समाधान संभव है।
घरेलू रंग अपनाएं: हल्दी, बेसन, टेसू के फूलों, गुलाब और गुड़हल से बने रंग सुरक्षित हैं। ये त्वचा को पोषण देते हैं और संक्रमण रोकते हैं। हल्दी के गुण त्वचा को चमकदार बनाते हैं।
तेल मलें पहले: नारियल या तिल का तेल लगाएं। इससे रंग त्वचा में समाता नहीं, आसानी से धुल जाता है। बालों पर भी लगाएं ताकि जड़ें सुरक्षित रहें।
हल्का भोजन चुनें: फल, नारियल पानी, लस्सी, नींबू शरबत लें। तला-भुना त्यागें ताकि पेट ठीक रहे और ऊर्जा बनी रहे।
पानी पिएं भरपूर: पसीने से डिहाइड्रेशन रोकने को पुदीना शरबत या निम्बू पानी लें। त्वचा हाइड्रेटेड रहेगी।
आंख-त्वचा बचाएं: चश्मा पहनें, खेल बाद ठंडे पानी से धोएं। गुलाबजल से आंखें साफ करें। मिलावटी मिठाइयों से दूर रहें, विश्वसनीय स्रोत चुनें।
इन उपायों से होली 2026 यादगार बनेगी। आयुर्वेद के साथ रंगों का मजा दोगुना हो।