
आज के व्यस्त जीवन में तनाव और थकान आम बात हो गई है। ऐसे में योग और प्राणायाम शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के लिए रामबाण साबित हो रहे हैं। आयुष मंत्रालय ने सभी को नियमित प्राणायाम अपनाने का आह्वान किया है। मंत्रालय के अनुसार, सांस पर नियंत्रण से जीवन में स्थिरता आती है और कई रोग दूर होते हैं।
पातंजलि योगसूत्र में प्राणायाम को चार प्रमुख भेदों में विभाजित किया गया है, जो सांस की गति पर आधारित हैं। इनका नियमित अभ्यास शरीर को मजबूत बनाता है, मन को शांत रखता है और एकाग्रता बढ़ाता है। विशेषज्ञों की सलाह से धीरे-धीरे शुरू करें, रोज 10-15 मिनट पर्याप्त हैं। यह चिंता, अनिद्रा जैसी परेशानियों को जड़ से समाप्त करता है।
रेचक या बाह्यवृत्ति पहला चरण है, जहां सांस को पूरी तरह बाहर धकेला जाता है। इससे फेफड़े शुद्ध होते हैं, विषैले तत्व निकलते हैं और तनाव घटता है।
पूरक या आभ्यंतरवृत्ति में गहरी सांस अंदर ली जाती है, जिससे ऑक्सीजन बढ़ता है, ऊर्जा मिलती है और मन स्थिर होता है।
कुंभक या स्तम्भवृत्ति तीसरा महत्वपूर्ण प्रकार है। अंतःकुंभक में सांस अंदर रोकें, बाह्यकुंभक में बाहर। इससे प्राण संचय होता है, शांति मिलती है। शुरुआत सतर्कता से करें।
चतुर्थ या बाह्याभ्यंतरविषयाक्षेपि सबसे उन्नत है। यहां सांस स्वतः रुक जाती है, योगी को आध्यात्मिक ऊंचाइयां प्राप्त होती हैं। लंबे अभ्यास से ही संभव।