
छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में सुरक्षा बलों को मिली बड़ी सफलता। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के बस्तर दौरे के दौरान 30 माओवादी कैडरों ने हिंसा त्यागकर समाज की मुख्यधारा में वापसी का फैसला किया। इनमें 20 महिलाएं और 10 पुरुष शामिल हैं, जो साउथ सब जोनल ब्यूरो से जुड़े थे। इनके सिर पर कुल 85 लाख रुपये का इनाम था।
ये कैडर कंपनी कमांडर, एरिया कमेटी सदस्य, डीएकेएमएस, केएएमएस अध्यक्ष और जनताना सरकार के पदाधिकारी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर तैनात रहे। आत्मसमर्पण के दौरान उन्होंने कार्डेक्स वायर बंडल और 50 जिलेटिन स्टिक्स सुरक्षा बलों को सौंप दिए। यह समारोह उप महानिरीक्षक बीएस नेगी, एसपी डॉ. जितेंद्र यादव और अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में संपन्न हुआ।
डीआरजी, जिला बल, स्पेशल फोर्स, एसटीएफ, कोबरा और केरिपु बटालियनों के संयुक्त अभियान ने यह संभव बनाया। लगातार सक्रियता, विश्वास निर्माण और संवेदनशीलता से माओवादियों को प्रेरित किया गया। एसपी डॉ. यादव ने कहा कि भ्रामक विचारधाराओं को छोड़कर समाज में लौटें। ‘पूना मारगेम’ नीति सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित कर रही है।
आईजी सुंदरराज पट्टलिंगम ने इसे माओवादी संगठन के पतन का संकेत बताया। सुरक्षा कैंप, सड़कें, अभियान और विकास से उनका आधार क्षीण हो रहा है। बाकी कैडरों से अपील की कि हिंसा विनाश लाती है, शांति का रास्ता अपनाएं। 1 जनवरी 2024 से बीजापुर में 918 आत्मसमर्पण, 1163 गिरफ्तारियां और 232 मुठभेड़ों में ढेर। प्रत्येक को 50 हजार की सहायता, विधिक प्रक्रिया जारी।