
फाल्गुन मास की शुरुआत होते ही प्रकृति में रंग बिखरने लगते हैं। पीली सरसों के खेत लहराने लगते हैं और होली का उत्साह चारों ओर फैल जाता है। लेकिन इसी मौसम में सर्दी-जुकाम और वायरल बीमारियां भी चरम पर पहुंच जाती हैं। पहाड़ी ठंडी हवाओं का असर रोग प्रतिरोधक क्षमता पर पड़ता है, जिससे संक्रमण आसानी से फैलते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, आहार में बदलाव लाकर इनसे आसानी से बचा जा सकता है।
दिन की गर्मी और रात की ठंडक से शरीर में पित्त बढ़ता है और कफ कम होता है। पाचन शक्ति भी सुस्त पड़ जाती है। ऐसे में सही भोजन शरीर को मजबूत बनाने का सबसे अच्छा तरीका है।
सबसे पहले जानें क्या न खाएं। चने का सेवन पूरी तरह बंद रखें। होली में भुने चने खाने की परंपरा है, लेकिन आयुर्वेद इसे भारी मानता है। कमजोर जठराग्नि में यह कब्ज, गैस और अपच पैदा कर सकता है। बासी, तामसिक भोजन से भी दूर रहें, खासकर महाशिवरात्रि के बाद महादेव के मास में।
अब क्या खाएं? बेर और अंगूर सबसे उत्तम हैं। ये पेट को ठंडक देते हैं, रक्त शुद्ध करते हैं और इम्यूनिटी बढ़ाते हैं। मौसमी रोगों से सुरक्षा का ये प्राकृतिक कवच है। सुबह जल्दी उठकर व्यायाम भी जरूरी है।
प्रकृति के अनुसार जीवनशैली अपनाएं। आहार और दिनचर्या से बदन को दवा की जरूरत ही न पड़े। इस फाल्गुन स्वस्थ रहकर त्योहार मनाएं।