टाइट जूते और हाई हील के स्वास्थ्य प्रभाव
हम अक्सर कपड़े, हेयरस्टाइल और फिटनेस पर ध्यान देते हैं, लेकिन पैर में क्या पहनते हैं, इस पर कम गौर करते हैं। विज्ञान के अनुसार, जूते सिर्फ फैशन नहीं, बल्कि पैर की चाल, दबाव और निचले शरीर की गति से सीधे जुड़े होते हैं।
यदि जूता छोटा या बहुत टाइट हो, तो पैर की उंगलियों को सही जगह नहीं मिलती, जिससे लगातार दबाव पड़ता है। समय के साथ यह दर्द, छाले, कॉर्न और मोटी त्वचा की परत बन सकता है।
जूते की चौड़ाई भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। अगर आगे से जूता संकरा हो, तो उंगलियां आपस में दब जाती हैं, जिससे चलने में कठिनाई और दर्द हो सकता है। आदर्श जूता उंगलियों को थोड़ा फैलने की जगह देता है।
हाई हील पहनने से केवल पैर ही नहीं, बल्कि घुटने और मस्क्युलोस्केलेटल सिस्टम पर भी असर पड़ता है। कई शोधों ने पाया कि ऊँची हील से घुटने पर लोड और मोमेंट बढ़ जाता है, जिससे दर्द और चोट का जोखिम बढ़ता है। कभी‑कभी हील पहनना हानिकारक नहीं, लेकिन रोज़ाना लंबे समय तक पहनना समस्याएं बढ़ा सकता है।
पैर शरीर का वजन संभालते हैं, इसलिए जूते का आकार बदलने से चलने का तरीका भी बदल सकता है। गलत फिटिंग जूता पैर को सामान्य स्थिति में रखने में बाधा बनता है, जिससे लगातार असहजता या दर्द महसूस हो सकता है।
विज्ञान कहता है कि जूता ऐसा होना चाहिए जिसमें पैर आराम से रहे, उंगलियों पर दबाव न पड़े, एड़ी जूते से बाहर न निकले और चलने में कोई परेशानी न हो। यदि जूता पहनने के कुछ ही मिनटों में दर्द या जलन महसूस हो, तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।


