चुप्पी नहीं, बात जरूरी: आत्महत्या रोकथाम पर नया नजरिया
Lok Shaktiसंवाददाता (Reporter)
September 9, 2026
नई दिल्ली, 9 सितंबर – अक्सर बाहर से सामान्य लगने वाले व्यक्ति के भीतर गहरी चिंता, अकेलापन या निराशा छिपी रहती है। ऐसी स्थितियों में सिर्फ़ देखना नहीं, बल्कि बात करना और समझने की कोशिश करना आवश्यक है। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस का मुख्य संदेश यही है कि चुप्पी नहीं, संवेदनशील बातचीत बदलाव की फसल बो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार हर साल 7.2 लाख से अधिक लोग आत्महत्या के कारण निधन हो जाता है, जिससे परिवार, मित्र और सम्पूर्ण समाज पर गहरा असर पड़ता है। 2026 में "आत्महत्या के बारे में सोच बदलना" थीम के अन्तिम वर्ष में डर, भ्रांतियों और सामाजिक कलंक को कम करने का लक्ष्य है।
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