
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हाई ब्लड प्रेशर एक गंभीर चुनौती बन चुका है। दुनिया भर में करीब 10 करोड़ लोग इससे जूझ रहे हैं, तो भारत में यह हार्ट अटैक और स्ट्रोक का मुख्य कारण है। डॉक्टर दवाओं के साथ योग और जीवनशैली सुधार की सलाह देते हैं। ऐसे में शीतकारी प्राणायाम एक सरल लेकिन असरदार तरीका है जो ब्लड प्रेशर को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करता है।
यह प्राणायाम ठंडक प्रदान करने वाली श्वास विधि है। गर्मी के मौसम में यह और भी उपयोगी साबित होता है। दांतों के बीच से हवा अंदर लेने पर शरीर को शीतलता मिलती है। यह तनाव घटाता है, स्वायत्त तंत्रिका तंत्र को संतुलित करता है और पैरासिम्पेथेटिक सिस्टम की अतिसक्रियता को नियंत्रित करता है। शोध बताते हैं कि नियमित अभ्यास से सिस्टोलिक प्रेशर में जबरदस्त कमी आती है।
शीतकारी के फायदे कई हैं। यह बीपी कम करता है, दिल की धड़कन सामान्य रखता है, चिंता दूर करता है। शरीर को ठंडक देता है, पित्त को शांत करता है, गर्मी की परेशानियां दूर भगाता है। श्वास गति मंद करता है, ऑक्सीजन बेहतर उपयोग होता है, फेफड़े मजबूत होते हैं। कोई नुकसान नहीं, इसलिए दवाओं के पूरक के रूप में सुरक्षित।
अध्ययनों से साबित है कि शीतकारी हल्के-मध्यम बीपी वाले मरीजों में सिस्टोलिक प्रेशर घटाता है। तनाव मुक्ति और तंत्रिका संतुलन इसका राज है। अभ्यास तरीका: ध्यान मुद्रा में बैठें, पीठ सीधी, आंखें बंद। हाथ घुटनों पर। दांत हल्के दबाएं, होंठ खोलें। दांतों से सांस लें, आवाज पर ध्यान। मुंह बंद कर नाक से छोड़ें। रोज 10 मिनट, 20-30 दिन जारी रखें।
विशेषज्ञ कहते हैं, प्राणायाम दवाओं को मजबूत बनाता है, हृदय जोखिम घटाता है। समग्र स्वास्थ्य बेहतर होता है। हाई बीपी वाले इसे अपनाएं, लेकिन सावधानी बरतें। डॉक्टर से सलाह लें। सर्दी-खांसी, साइनस, सांस समस्या में सतर्क रहें। गर्भवती या गंभीर बीमारी में गुरु मार्गदर्शन जरूरी।

